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सन्देश

माध्यमिक शिक्षा परिषद्, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट स्तर की परीक्षाओं को संचालित करने वाली विश्व की एक सर्वौच्च संस्था है।

इस प्रगतिशील युग में नित नवीन तकनीक के उपयोग के बिना प्रगति की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। माध्यमिक शिक्षा परिषद् द्वारा भी इसी पथ का अनुसरण करते हुए प्रथम बार अपने पारम्परिक परिवेश से बाहर निकल कर नवीन तकनीकी को अपनाते हुए शैक्षिक सत्र 2013-2014 से अग्रिम पंजीकरण की समस्त कार्यवाहियों को इस नवसृजित वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन कराया गया, जो कि शतप्रतिशत सफल रहा था। इससे परिषदीय कार्यों की गुणवत्ता एवं विश्वसनीयता में आशातीत वृद्धि हुई। इस सफलता के लिये हम प्रदेश के समस्त शिक्षाधिकारियों एवं समस्त संस्थाओं के प्रधानाचार्यो आदि का विशेष आभार व्यक्त करते है।

श्री पार्थसारथी सेन शर्मा, IAS

प्रमुख सचिव, माध्यमिक शिक्षा

श्रीमती मोनिका रानी, IAS

महानिदेशक, स्कूल शिक्षा

डॉ. महेंद्र देव

शिक्षा निदेशक(मा.) एवं सभापति, माध्यमिक शिक्षा परिषद

श्री भगवती सिंह

सचिव, माध्यमिक शिक्षा परिषद्

माननीय मुख्यमंत्री

श्री योगी आदित्यनाथ

श्रीमती गुलाब देवी

माननीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), माध्‍यमिक शिक्षा

प्रधानाचार्या

श्रीमती राजलक्ष्मी राय

प्रधानाचार्या का संदेश

शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र की संस्कृति का संरक्षण, संवर्धन एवं हस्तानांतर होता है | छात्राएं शिक्षा के माध्यम से ही अपने व्यक्तित्व का विकास तथा राष्ट्रीय संस्कृति को ग्रहण कर सकती हैं |

शिक्षा हमारे अन्तर्निहित अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञानरुपी प्रकाश को प्रज्जवलित करती हैं | यह व्यक्ति को सभ्य सुसंस्कृत बनाने का एक सशक्त माध्यम हैं | यह हमारी अनुभूति एवं संवेदनशीनलता को प्रबल करती है तथा वर्तमान एवं भविष्य के निर्माण का अनुपम स्रोत हैं | आज का मानव अपने मानवीय मूल्यों के प्रति विमुख हो चुका हैं | ऐसा स्थिति में उचित शिक्षा ही हमारे आदर्श एवं विश्वास समाज में अनुपस्थित होते जा रहे हैं | ऐसी स्थिति में उचित शिक्षा ही हमारे मूल्यों को विकसित करने में सार्थक कदम उठा सकती हैं | शिक्षा हमारे वंछित शक्ति का विकास करती हैं | इसके आधार पर ही अनुसंधान और विकास को बल मिलता है | यह हमारी संवेदनशीलता और दृष्टि को प्रखर करती है | इससे वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास होता है तथा समझ एवं चिन्तन में स्वतंत्रता आती हैं | एक प्रकार से शिक्षा राष्ट्रीय आम्तनिर्भरता एवं नारी के सर्वागीण विकास की आधारशिला हैं | Read More

संचालक

श्री पार्थ राय

संचालक का संदेश

शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र की संस्कृति का संरक्षण, संवर्धन एवं हस्तानांतर होता है | छात्राएं शिक्षा के माध्यम से ही अपने व्यक्तित्व का विकास तथा राष्ट्रीय संस्कृति को ग्रहण कर सकती हैं |

शिक्षा हमारे अन्तर्निहित अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञानरुपी प्रकाश को प्रज्जवलित करती हैं | यह व्यक्ति को सभ्य सुसंस्कृत बनाने का एक सशक्त माध्यम हैं | यह हमारी अनुभूति एवं संवेदनशीनलता को प्रबल करती है तथा वर्तमान एवं भविष्य के निर्माण का अनुपम स्रोत हैं | आज का मानव अपने मानवीय मूल्यों के प्रति विमुख हो चुका हैं | ऐसा स्थिति में उचित शिक्षा ही हमारे आदर्श एवं विश्वास समाज में अनुपस्थित होते जा रहे हैं | ऐसी स्थिति में उचित शिक्षा ही हमारे मूल्यों को विकसित करने में सार्थक कदम उठा सकती हैं | शिक्षा हमारे वंछित शक्ति का विकास करती हैं | इसके आधार पर ही अनुसंधान और विकास को बल मिलता है | यह हमारी संवेदनशीलता और दृष्टि को प्रखर करती है | इससे वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास होता है तथा समझ एवं चिन्तन में स्वतंत्रता आती हैं | एक प्रकार से शिक्षा राष्ट्रीय आम्तनिर्भरता एवं नारी के सर्वागीण विकास की आधारशिला हैं | Read More

विद्यालय के बारे में

शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र की संस्कृति का संरक्षण, संवर्धन एवं हस्तानांतर होता है | छात्राएं शिक्षा के माध्यम से ही अपने व्यक्तित्व का विकास तथा राष्ट्रीय संस्कृति को ग्रहण कर सकती हैं |

शिक्षा हमारे अन्तर्निहित अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञानरुपी प्रकाश को प्रज्जवलित करती हैं | यह व्यक्ति को सभ्य सुसंस्कृत बनाने का एक सशक्त माध्यम हैं | यह हमारी अनुभूति एवं संवेदनशीनलता को प्रबल करती है तथा वर्तमान एवं भविष्य के निर्माण का अनुपम स्रोत हैं | आज का मानव अपने मानवीय मूल्यों के प्रति विमुख हो चुका हैं | ऐसा स्थिति में उचित शिक्षा ही हमारे आदर्श एवं विश्वास समाज में अनुपस्थित होते जा रहे हैं | ऐसी स्थिति में उचित शिक्षा ही हमारे मूल्यों को विकसित करने में सार्थक कदम उठा सकती हैं | शिक्षा हमारे वंछित शक्ति का विकास करती हैं | इसके आधार पर ही अनुसंधान और विकास को बल मिलता है |.. Read More